Wednesday, December 30, 2015

 मित्रो ! यह मध्यप्रदेश की धरती जिसकी राजधानी भोपाल, यहाँ केवल भोपाली राग गया जाता है।भोपाल से प्रकाशित होने वाली समस्त पत्र-पत्रिकाएं जहाँ नवगीत को ख़ारिज कर, केवल गीत की राग अलापती हों। उनकी दृष्टि में अभी भी आदर. हरिवंशराय बच्चन जी, और आदर.गोपाल दास नीरज से आगे गीत खड़ा ही नहीं हुआ।ऐसे वातावरण में अगर आप चाहें कि अपने नवगीत किसी भोपाल की पत्रिका में प्रकाशन के लिए भेजें तो वहां बैठे संपादक महोदय पहले नव शब्द को अलग करते हैं। फिर गीत प्रकाशित होता है। जहाँ इतनी बड़ी विडम्बना हो।भाई चित्रांश वाघमारे जैसी प्रतिभा अपने आपको बचाए और बनाए रखी।उनके चिंतन और कलम दोनों को नमन करता हूँ।और चर्चा टिप्पणी के लिए इस अद्भुत प्रतिभा को आपके समक्ष प्रस्तुत कर स्वयं गौरवान्वित महसूस करता हूँ।आप सबके आशीर्वचन सुझावात्मक प्रतिक्रियाएं टिप्पणी इस रचनाकार की रचनाधर्मिता पर सादर आमन्त्रित हैं।
आपका ही
वैचारिक मित्र
-रामकिशोर दाहिया
संवेदनात्मक आलोक मंच

2 comments:

Bhavana Tiwari said...

वाह 👍बहुत अच्छा लगा इस पृष्ठ पर आकर ....

Bhavana Tiwari said...

वाह 👍बहुत अच्छा लगा इस पृष्ठ पर आकर ....