Tuesday, January 12, 2016

साधारण भाषा में बड़ी बात

नवगीत यदि सतही हो ते बहुत ऊब होती है और यदि विषय का निर्वाह विश्वसनीय तरीके से हो तो हर पंक्ति के साथ उत्सुकता बढती जाती है। डा० रवि शंकर पांडे के गीत रस परिपाक और निर्वाह दोनों दृष्टि से उल्लेखनीय हैं। उन्होंने प्रचलित मुहावरों का बहुत अच्छा प्रयोग किया है। ये ठीक है कि व्यवस्था के प्रति आक्रोश अब नवगीतों की पहचान बन गया है, लेकिन कविता वक्त का आईना सदैव रही है। इसलिये विषय वही है पर उसका उल्लेख सबने अलग-अलग क्या है।  डा. पांडे के नवगीतों में भी वह सब है जो समयानुकूल है। उनका अंतिम गीत बहुत मिठास लिये हुये है। मन को छू लेता है, साधारण भाषा में बड़ी बात उनकी विशेषता है। दाहिया जी गीत चयन सराहनीय है।

-रामबाबू रस्तोगी 

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