Wednesday, January 13, 2016

भगीरथ कहाँ गये

[ सात ]

गंगा बहुत उदास
भगीरथ कहाँ गये

लहरों ने
अपने तट खोए
तट लगते अब
रोये रोये
कूड़ा, कचरा
नाली, नाला
सब कुछ है
गंगा में डाला
हम इतने बेशर्म
इसी को
कहते रहे विकास
भगीरथ कहाँ गये

हम बेहद
हो गए सयाने
पाप किए
जाने-अनजाने
सदियों जिसने
हमको पाला
हमने उसको
विष दे डाला
झेल रही
अपनी संतति का
अभिशापित संत्रास
भगीरथ कहाँ गये

कहाँ गए
अनुबंध पुराने
यह तो कोई
भगीरथ जाने
सगर पुत्र
फिर से अकुलाये
गंगा कौन
बचाकर लाये
पूछ रहे
जन-जन के मन से
गंगा के उच्छ्वास
भगीरथ कहाँ गये

-डा० जगदीश व्योम

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