Sunday, January 03, 2016

लय न टूटे देखिएगा

[ सात ]

-डॉ.शिवबहादुर सिंह भदौरिया

गुनगुनाती जिंदगी की
लय न टूटे
देखिएगा

यह न हो, लोहा हमारे
सगे रिश्ते तोड़ दे
भूमि की
हरियालियों को
मरुस्थलों में छोड़ दें

रंग-रस मय मधुर
वृन्दावन न छूटे
देखिएगा

तोड़ दरवाजे कहीं
घर में न फिर
अन्धड़ धँसे
खिलखिलाकर
आंगनों में
प्रेत का साया हँसे

द्वेष-दानव एकता का
धन न लूटे
देखिएगा

बंदरों के हाथ में
सद्ग्रन्थ
के पन्ने पड़े
दाढ़ में गंगाजली को
दाबकर कुत्ते लड़ें

शंख, घण्टा
आस्था का घट न फूटे
देखिएगा

         

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