Saturday, January 16, 2016

झांकते बादल मिलेंगे

[ एक ]

हाँ, देखना
इस झील में ही
एक दिन
महकते शतदल खिलेंगे।

आज जल-कुम्भी
भले छायी हुई हो
नीर-निर्मल
सतह पर
काई हुई हो
यत्न कर
इनको हटाओ
और देखो
झाँकते बादल मिलेंगे।

फिर दिखेंगे तैरते
जल में शिकारे
इंद्र-धनुषी रंग वाले
छोर सारे
बाँह में फ़िर
बाँह डाले
इसी जल को
छींटते करतल मिलेंगे।

फिर अजाने,
शंख-ध्वनियां
साथ होंगी
अर्घ्य देती
युगल
छवियां साथ होंगी
फिर तरंगित
पंक्तियों में
दीप अनगिन
डोलते झिल-मिल मिलेंगे।
     
-शैलेन्द्र शर्मा

1 comment:

Mamta Bajpai said...

बहुत सुन्दर गीत