Sunday, March 06, 2016

फंदा ढीला है

-नईम
जोड़-जोड़ गठिया का मारा
मौसम सीला है

खोलूँ जब तक, दुष्ट हवाओं ने
जड़ दिए किवाड़
काटूँ कैसे? शस्त्र भोथरे
ये पल हुए पहाड़
खूँटे से बँध गया हर
कदम चुभता कीला है

साँझ बसाई बस्ती जो
यह सुबह उजड़ जाए
किसे पुकारूँ, पता नहीं
कब साँस उखड़ जाए
डोरे नहीं, गुलाबी रंग
आँखों का पीला है

भूल-चूक, लेनी-देनी जो
कहा-सुना हो माफ
हर दुकान पर पाए मैंने
कद से ओछे माप
फाँसी से इनकार किसे
पर फंदा ढीला है

-नईम 

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